Sunday, December 27, 2009

क्यूँ ?


  1. आदमी हो, आदमी को, छलते कयूँ हो ?
    दूसरों के सर रख के पाँव चलते क्यूँ हो ?

    शोक ही शक्सियत का, ताज है आखिर ,
    बेगाने वज़ूद पे , नाहक जलते कयूँ हो ?

    आदतों पे हो के कुर्बां, आदम मसीहा बने ,
    सूरज से क्या सवाल, कि ढ़लते कयूँ हो ?

    आना जाना ही तो, हर शय का उसूल ,
    फिर आ के जाने से, भला डरते कयूँ हो ?

    सवाती बूँद कि खातिर , पपीहा मर रहे,
    हाथ खाली हैं तो क्या , मलते कयूँ हो ?

    गर दर्द दिल में , दफ़न कर सकते नहीं ,
    'कुरालिया' हर शय से , प्यार करते कयूँ हो ?

10 comments:

निर्मला कपिला said...

सवाती बूँद कि खातिर , पपीहा मर रहे,

हाथ खाली हैं तो क्या , मलते कयूँ हो
वाह बहुत सुन्दर भाव हैं। आपका ब्लागबानी पर आने के लिये स्वागत है। बधाई

Mithilesh dubey said...

क्या बात है , लाजवाब लगी आपकी रचना । स्वागत है आपका

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया रचना .. इस क्‍यूं का जबाब किसी के पास नहीं .. सब अंधी दौड में भाग ले चुके हैं !!

दिगम्बर नासवा said...

आदतों पे हो के कुर्बां, आदम मसीहा बने ,
सूरज से क्या सवाल, कि ढ़लते कयूँ हो

सुभान अल्ला ..... सब के सब शेर लाजवाब ...... ज़मीनी हक़ीकत से जुड़े ...... लाजवाब ग़ज़ल है

AKHRAN DA VANZARA said...

बहुत सुन्दर ... भाव- अभिव्यक्ति ...
कोमल शब्दों का चयन ...
इस के लिए आपको साधुवाद !!!!

sanjeev kuralia said...

मैं आभारी हूँ ..श्री राकेश वर्मा जी का जिन की मदद स्वरूप मेरा ब्लॉग बन पाया तथा ब्लोग्वानी लिंक लगाने मैं भी वर्मा जी ने बहुत सहयोग दिया.... धन्यवाद वर्मा जी !

AKHRAN DA VANZARA said...

आप का अति आभारी हूँ कुरलिया जी
आपने इस नाचीज़ को अपने दिल के साथ साथ अपने ब्लॉग में भी जगह दी !!!!
हार्दिक धन्यवाद एवं ढेरों शुभकामनाएं

kuldip said...

"Kyon" a very good collection.

Anonymous said...

"kyon" very heart touching

kuldip said...

"Kyon" - Heart Touching