ज़िकर दर्द का मैं ,कैसे कर दूँ !
जान , लफ्ज़ों के हवाले कर दूँ !
मैं कोई पीर ,पैगम्बर तो नहीं ,
जो सर काट , हथेली पे धर दूँ !
ह़क नमक का, अदा करते हैं ,
कैसे अश्कों मे, मिश्री भर दूँ !
जा पहुँचे ,जो तेरे ख्यालों तक ,
बता याद को , कोन से पर दूँ !