Tuesday, August 14, 2012

15 अगस्त पर विशेष


वतन से प्यार का ज़ज्बा , हर दिल में जगा दे !
वो शमा भगत सिंह वाली , रग रग में जला दे !

ना हों ज़ात के झगडे , ना धर्मों के हों बंटवारे ,
ऐ मालिक सभी का , बस एक ही रिश्ता बना दे !

भाषाओं से ना हो , पहचान किसी आदम की ,
एक भाषा प्यार की , जन जन को सिखा दे !

अपने अपने काम को , समझें सभी पूजा ,
रिशवत का दाग , हर एक चेहरे स हटा दे !

ना लाशों से बने ,सरहदें कहीं मुल्कों की ,
अमनों चेन से रहना , हर मन को सिखा दे !

शहीदों की सोगात ,आज़ादी सस्ती नहीं मिली ,
डर है की नई पीढ़ी , इसे यूँ ही ना गँवा दे !

आज़ाद माँ के सपूत ,नशों में गर्क हो रहे हैं ,
अँधेरा में घिर चुके जो , उन्हें रौशनी दिखा दे !

वत्तन की खातिर , ख़ुशी से जान भी दे दें ,
आन सलामत रहे वतन की ,एहसास दिलादे !

नारी मेरे वतन की, सीता भी है, झांसी भी ,
बस बेगानी सभ्यता से , थोडा सा बचा दे !

चाँद को छूने वाला दिल, क्या नहीं कर सकता,
मेरे हर भारत वासी को , नित नया हौसला दे !

हम हैं हिन्दुस्तानी , हमारी शान हिन्दुस्तान ,
हमारी आन है तिरंगा ,हर जान को सिखा दे

'
कुरालीया ' क़र्ज़ ,इस धरती का चुकाना लाजिम है ,
बची हर सांस अपनी ,बस राह में वतन की लगा दे !

वतन से प्यार का ज़ज्बा, हर दिल में जगा दे !
वो शमा भगत सिंह वाली , रग रग में जला दे !

Friday, February 24, 2012

जिंदगी



इस तरह शर्तों पे कैसे, कब तक कटेगी जिन्दगी !
गिर के यूँ कब तक , संभलती रहेगी जिन्दगी !

अपने अपने गरूर की, सीमा पे खड़े हुए हैं हम
बीच मैं गहरी है खाई , गिर कर रहेगी जिन्दगी

तनहाइयों के शोर में सिमटे हुए हर शख्स को ,
यूँ ठहाकों के कफ़न से ,कब तक ढकेगी जिन्दगी !

प्यार दे कर प्यार लेना , गर हुनर ये सीख लें ,
ना कोई बेगाना रहेगा ,ना बे मानी रहेगी जिन्दगी !