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Sunday, January 24, 2010

ज़ज्बा ..एक गीत वतन के नाम

वतन से प्यार का ज़ज्बा , हर दिल में जगा दे !
वो शमा भगत सिंह वाली , रग रग में जला दे !

ना हों ज़ात के झगडे , ना धर्मों के हों बंटवारे ,
ऐ मालिक सभी का , बस एक ही रिश्ता बना दे !

भाषाओं से ना हो , पहचान किसी आदम की ,
एक भाषा प्यार की , जन जन को सिखा दे !

अपने अपने काम को , समझें सभी पूजा ,
रिशवत का दाग , हर एक चेहरे स हटा दे !

ना लाशों से बने ,सरहदें कहीं मुल्कों की ,
अमनों चेन से रहना , हर मन को सिखा दे !

शहीदों की सोगात ,आज़ादी सस्ती नहीं मिली ,
डर है की नई पीढ़ी , इसे यूँ ही ना गँवा दे !

आज़ाद माँ के सपूत ,नशों में गर्क हो रहे हैं ,
अँधेरा में घिर चुके जो , उन्हें रौशनी दिखा दे !

वत्तन की खातिर , ख़ुशी से जान भी दे दें ,
आन सलामत रहे वतन की ,एहसास दिलादे !

नारी मेरे वतन की, सीता भी है, झांसी भी ,
बस बेगानी सभ्यता से , थोडा सा बचा दे !

चाँद को छूने वाला दिल, क्या नहीं कर सकता,
मेरे हर भारत वासी को , नित नया हौसला दे !

हम हैं हिन्दुस्तानी , हमारी शान हिन्दुस्तान ,
हमारी आन है तिरंगा ,हर जान को सिखा दे

'कुरालीया ' क़र्ज़ ,इस धरती का चुकाना लाजिम है ,
बची हर सांस अपनी ,बस राह में वतन की लगा दे !


वतन से प्यार का ज़ज्बा, हर दिल में जगा दे !
वो शमा भगत सिंह वाली , रग रग में जला दे !