
ये बात झूठ है, कि सब झूठ है ज़माने में !
नहीं फरेब , किसी बच्चे के मुस्कुराने में !!
क्या कभी चाँद भी रूठता है , कहीं सूरज से,
फासला तय ही सही , दोनों के आने जाने में!
आराम खुद ही , सदा दिल को गुदगुदायेगा ,
लगा समय , किसी बजुर्ग के पांव दबाने में !
समझ पैगाम , महोब्बत का नाम है देना ,
फलों का मोल छिपा ,शाख के झुक जाने में !
'कुरालीया ' सब कुछ ,बिखर ना जाये कही ,
लगा ना देर किसी, रूठे को कभी मनाने में !






