Saturday, January 2, 2010

नवज़ात


एक नवज़ात की ज़ात क्या है ?
धर्म क्या है , औकात क्या है !

रोना ,सोना , विछौना भिगोना ,
छाती से दो बूँद ,दूध दोहना ,
माँ से बड़ा ,जज़्बात क्या है
एक नवज़ात की जात क्या है !


ना भेद ,ना भाव ,ना द्वेष ,ना दाव
नरम ,नाज़ुक ,निरोल ,बे दाग
वो क्या जाने , हालात क्या है !
एक नवज़ात की जात क्या है !


ना छल, ना बल ,ना कोइ दल ,
भाषा ,आशा ,ना कोई निराशा ,
ना जाने शय क्या ,मात क्या है!
एक नवजात की जात क्या है !

ना दर , ना जर ,ना कोई घर ,
न तर्क ,ना अर्थ , ना कोई फर्क ,
दिन है क्या, और रात क्या है !

एक नवजात की जात क्या है !
ना फायदा , ना कोई कायदा ,
ना वायदा , ना कम , ना जायदा ,
वो ना जाने , आघात क्या है !

एक नवजात की जात क्या है
ना शर्म ,ना मर्म ,ना कोई कर्म ,
ना स्वाद ,विवाद , ना कोई राज ,
पहल है क्या, और बाद क्या है !

एक नवजात की जात क्या है !
ना अर्ज़ ,ना मर्ज़ ,ना खुदगर्ज़ ,
ना फ़र्ज़ ,ना क़र्ज़ ,ना कोई गरज ,
वो ना जाने , सोगात क्या है

एक नवज़ात की जात क्या है ,
धर्म है क्या , औकात क्या है !






2 comments:

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर पोस्ट।बधाई।

निर्मला कपिला said...

कुरालिया जी लाजवाब रचना है किस पँक्ति को कहूँ हर पँक्ति दिल मे उतर गयी। सही मे आप बहुत अच्छा लिखते हैं बहुत बौत बधाई और शुभकामनायें देर से आने के लिये क्षमा चाहती हूँ । कुछ व्य्6ास्त रही