Tuesday, February 16, 2010

ग़ज़ल


दिल को , दस्तक देता रहता ,
धुन्दला ,धुन्दला एक फ़साना !

ख्वावों में है , एक ही मंज़र ,
उसका आना , उसका जाना !

हंसता गुल ,समझाए सबको ,
सच है , कल मेरा मुरझाना !

राह बदल लेता है , अक्सर ,
सीधा चला , कब ये ज़माना !

फूल खिला तो , लाश मिली ,
मुबारक , भंवरे का मर जाना !

कैसे रुके दिल, जब रोना चाहे,
यादें तो हैं, बस फ़कत बहाना !

"कुरालीया " दिल दरिया जैसा ,
डूबना लाजिम , सबने माना !

7 comments:

दिगम्बर नासवा said...

राह बदल लेता है , अक्सर ,
सीधा चला , कब ये ज़माना..

ये इंसान ही हैं जो ज़माने की राह बनाते हैं ......... अच्छा लिखा है .....

Mithilesh dubey said...

आपकी गजल बहुत ही लाजवाब लगी , आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपने प्रोफाइल से जलता हुआ फोटो बदल लें, इसे आप निवेदन संमझें, राय नहीं ,

Devendra said...

अच्छे भाव हैं.
आप एक ब्लॉग अपने चित्रों का भी बनाएँ तो कितना अच्छा हो!

Udan Tashtari said...

कैसे रुके दिल, जब रोना चाहे,
यादें तो हैं, बस फ़कत बहाना !

-शानदार!

AKHRAN DA VANZARA said...

य़ादे तो है फक़त बहाना ....

बहुत खूब...!!!
कमाल की शायरी है आपकी !!!!

सरल शब्दो मे गहरी बात कहने का अन्दाज़ निराला है आप का !!!!


---- राकेश वर्मा

निर्मला कपिला said...

मैं क्या कहूँ आपकी रचनायें ही नही हर बात निराली है। एक दिन सबको आपकी सभी खासियतें बताऊँगी । बहुत बहुत आशीर्वाद हैाप जैसे बच्चे भगवान सब को दे।

सुलभ § सतरंगी said...

अच्छा लगा आपको पढ़कर.