Sunday, February 14, 2010

मेरा महबूब !


सूक्षम का शिखर ,
नजाकत की लहर ,
कयामत का कहर ,
मेरा महबूब !

सूरज का मीत ,
सितारे सा शीत ,
रौशनी की जीत ,
मेरा महबूब !

सागर का नीर ,
धरती का धीर ,
पातळ का आखीर ,
मेरा महबूब !

चन्दन की महक ,
कोयल की चहक ,
हिरन की सहक ,
मेरा महबूब !
हीरे की चमक ,
नूर की दमक ,
अम्बर की धमक ,
मेरा महबूब !


कली की झलक ,
परी की पल्क ,
इशकी सबक ,
मेरा महबूब !

फकीरी मलाल ,
रब्बी ख़याल ,
गहरा स्वाल ,
मेरा महबूब !




कोई नज़म ,
जाने बज़म
मेरी कलम ,
मेरा महबूब !




वक़्त की आह ,
कुदरत की राह ,
फरिश्ते की चाह,
मेरा महबूब !




प्यारे दोस्त "संत वरदान को " सप्रेम भेंट




3 comments:

AKHRAN DA VANZARA said...

अति सुन्दर ...

इतने सारे अलंकार "मह्बूब" के लिये एक आप जैसा हुनर मन्द ही खोज सकता है !!!!

Sant Vardan said...

Thanks Verma Ji and Sanjeev too who has translated one of my poems in Hindi script .

Sant Vardan said...

Thanks Verma Ji and special thanks to Sanjeev who spared time to translate my poem in Hindi